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रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) की अद्द्भुत शक्ति - दिमाग तेज़ करने के लिए रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) योग

 

रोज सुबह जब हम जागते हैं, उस समय की हमारे स्वास्थ्य की स्थिति ही हमारी दिनचर्या निश्चित करती है। शरीर की कोई भी बीमारी हमारे उत्साह को कमजोर कर देती है और हम अपने प्रतिदिन किये जाने वाले कार्य को ठीक से नहीं कर पाते। बहुत से योग और आसन हैं जिनसे हम अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं। 


तो चलिए Youthinfohindi के आज के ब्लॉग में हम आगे बढ़ते हैं और बात करते हैं रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) की अद्द्भुत शक्ति तथा योग के बारे में जिससे दिमाग को तेज़ करने में काफी मदद मिलती है। 

जैसे शरीर को स्वस्थ रखना जरुरी है, हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है। जिस तरह शरीर के स्वास्थ्य के लिए खाना बेहद जरूरी है, उसी तरह से दिमाग के स्वास्थ्य के लिए योग जरूरी है। योग, आसन और प्राणायाम के जरिए दिमाग की क्षमता और एकाग्रता को बढ़ाया जा सकता है। 


हमारा मस्तिष्क प्रतिदिन के कार्य को करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारी प्रतिक्रिया की क्षमता, समझने की क्षमता, महसूस करने की क्षमता और किसी कार्य को अच्छे से करने की क्षमता, ये सब हमारी मस्तिष्क की सेहत जुड़े हुए हैं।

शरीर के बाकि अंगो की तरह मस्तिष्क को भी प्रतिदिन पोषण और ऊर्जा की जरूरत होती है। जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शारीरिक व्यायाम आवश्यक है उसी तरह मस्तिष्क का योग और व्यायाम, बुद्धिमत्ता के लिए आवश्यक है। 


हममे से हर कोई अपने दिमाग का विकास चाहता है। हम जो कुछ भी अपने जीवन में करना चाहते है उसे लेकर हम कितने स्पष्ट है, इसी से सब कुछ तय होता है। अगर हममें स्पष्टता नहीं है तो हम किसी चीज को अपने आत्मविश्वास से पूरा करने की कोशिश करेंगे। आत्मविश्वास, स्पष्टता को साबित करने का बिलकुल भी सही तरीका नहीं है, दोनों में बहुत अंतर है। 

मान लीजिये आप एक बहुत ही व्यस्त सड़क को पार करना चाहते है और सड़क पर गाड़िया बहुत तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही है। आपकी आँखें नहीं है पर आपमें आत्मविश्वास है की आप सड़क पार कर लेंगे, या फिर आपको लगे की अभी मेरी राशि में मरना नहीं लिखा, मैं अभी नहीं मरने वाला,  मेरी उम्र तो बहुत लम्बी है, या फिर आप अपने भगवन, अल्लाह या जीजस का नाम ले कर सड़क पार करने चल पड़ेंगे। 


आप शायद आपके आत्मविश्वास या जो सड़क पर गाड़ी चलाने वाले है उनकी दया से सड़क पार कर भी ले, पर ऐसा बार बार नहीं होगा। ज्यादा से ज्यादा 1 या 2 बार, पर बार-बार अगर आप ऐसा करते रहेंगे तो ये आप भी जानते है आप कहाँ मिलेंगे। 


अगर आप कुछ भी सफलता पूर्वक करना चाहते है तो आपमें स्पष्टता होनी जरुरी है। अगर स्पष्टता लानी है तो इसका सबसे उत्तम उपाय है अपनी रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) को सही अवस्था में लाना क्यूंकि आपकी बुद्धि बड़े पैमाने पर वही से तय होती है। हमारी रीढ़ की हड्डी सिर्फ एक शरीर का हिस्सा नहीं है बल्कि यह एक बहुत बड़ा संचार का माध्यम है। रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) अकेली नहीं है ये कई चीजों का जटिल मेल है। इसलिए हर रोज़ इसे तानना जरुरी है। अगर ये एक ही अवस्था में रहे तो इसकी संचार क्षमता खो जाएगी। 


तो इसलिए हमे रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) का योग नमस्कार रोज़ करना चाहिये। यह योग नमस्कार हमारे रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) और कमर के इलाके को जबरदस्त तरीके से सक्रीय कर देता है।  ये रीढ़ की मांसपेशियों को बहुत मज़बूत कर देता है, रीढ़ को ताकतवर बनता है ताकि उम्र बढ़ने पर रीढ़ के झुकने से जो नसों में दर्द होता है उससे बचा जा सके। 

अगर पहले से ही रीढ़ को नुकसान हो चूका है तो भी आपकी रीढ़ को फिर से नया करने का सबसे अच्छा तरीका योग नमस्कार ही है। इसके फायदे पुरे शरीर में होते है। योग नमस्कार खुद में एक सरल और सम्पूर्ण प्रक्रिया है। इससे आपके भीतर ऊर्जा का एक प्राकृतिक चढाव होगा।



कैसे करें रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) योग


रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) के योग के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं फिर अपने दोनों हाथ को जोड़ कर नमस्कार की स्थिति में आएं। फिर इसी अवस्था में अपने पैरो को एकसाथ रखकर उकडू बैठ जाएं। इससे भी अच्छा तब होगा जब आप अपने दोनों पंजो को एकसाथ मिला कर बैठे। 

पर आप में से ज्यादातर लोग ऐसा नहीं कर पाएंगे, बहुत कम लोग ही ऐसा कर सकते है। 


आप अपने पैरो को कन्धों की सीध में रखें पर सिर्फ उतनी ही दुरी पर जितनी आपके कन्धों की चौड़ाई है। इसके बाद अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और कन्धों के पीछे ले जाके रखें। 

फिर वैसे ही अवस्था में हाथों को आगे लाएं फिर ऊपर उठाएं। कम  से कम 21 बार आप ऐसा कीजिये। अगर आप इतना नहीं कर पा रहे हैं तो 7-10 बार से शुरुआत कीजिये। धीरे धीरे इसे बढ़ाते रहे और 21 बार तक पहुंच जाएं। 21 बार ऐसा करना सबसे अच्छा माना जाता है। प्रतिदिन ऐसा करें, धीरे धीरे आप खुद महसूस करेंगे की इससे आपके काम करने की क्षमता में एक जबरदस्त अंतर आएगा और आपकी बुद्धि का भी विकास होगा। ये सब इसलिए होगा क्यूंकि आप अपनी रीढ़ को आराम देने और उसे सक्रीय करने के लिए कुछ आसान से उपाय कर रहे है। ऐसा करके देखिये आपके दिमाग का विकास अवश्य ही होगा।



रीढ़ की हड्डी (मेरुदंड) योग के साथ साथ बच्चो को शुरुआत से ही कुछ और योग और प्रायाणाम कराने की जरुरत है जिससे उनका दिमाग स्वस्थ होने के साथ साथ तेज़ भी होगा। दिमाग को स्वस्थ और तेज़ करने के लिए भ्रमण प्राणायाम, वज्रासन, ताड़ासन, अनुलोम विलोम प्राणायाम, ब्रह्मचर्यासन, पश्चिमोत्तानासन, सूर्य नमस्कार, बालासन, सुखासन, उत्तानासन, हलासन, अधोमुख श्वानासन, जानु शीर्षासन, उपविष्ठ कोणासन, शवासन, पद्मासन, गरुड़ासन, वृक्षासन जैसे योग और प्राणायाम भी किये जाने चाहिए। 

 





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