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शुक्राणुओं का अंडे तक का सफर - एक नए जीवन की शुरुआत (Journey of Sperms to Egg - Start of A New Life)

 हममे से काफी लोगों को यह नहीं पता की महिलाओं में अंडे और पुरुषों में शुक्राणु कहाँ से आते हैं और कब बनते है? एक नए जीवन को जन्म देने के लिए ये आपस में कैसे मिलते हैं? 

एक महिला को गर्भधारण करने के लिए प्रकृति ने एक बहुत ही खूबसूरत खेल रचा है। गर्भवती होने के पीछे एक आकर्षक जैविक तथ्य होता है। तो चलिए Youthinfohindi के आज के ब्लॉग में जानते हैं की शुक्राणु और अंडे कब बनते हैं, एक नए जीवन (Start of A New Life) के लिए शुक्राणुओं की दौड़ कैसे होती है और कैसे एक नए जीवन का जन्म होता है। 


महिला के शरीर के अंदर अंडा कब और कैसे बनता है
(When and How Egg is made inside a Woman's Body)
हर महिला के अंदर उसके पैदा होने से पहले ही लगभग 1 से 2 मिलियन अंडे बन जाते हैं। जन्म के बाद ही बहुत से अंडे मर जाते हैं और जैसे जैसे बच्ची बड़ी होनी शुरू होती है उसके अंदर के अंडों की शंख्या काफी कम होती जाती है। जब एक लड़की का मासिक चक्र शुरू होता है (Periods) तबसे लेकर उसकी रजोनिवृत्ति (end of Periods) तक उसके शरीर में सिर्फ 300 से 400 अंडे ही बचते हैं। 

अंडे महिलाओं के अंडाशय में होते हैं और हर महिला के पास दो अंडाशय होता है। मासिक धर्म के से पहले दोनों में से किसी एक अंडाशय में एक अंडा परिपक्व होता है और डिंबवाही नलिका (fallopian tube) के रास्ते गर्भाशय की तरफ आता है। गर्भाशय तक आने के रास्ते में अगर इसका मिलन शुक्राणुओं से हो जाता हैं तो ये अंडा गर्भशय की दिवार से जा कर चिपक जाता है और वही से एक नए जीवन की शुरुआत होती है। 


महिलाओं के शरीर में एक बार में सिर्फ एक ही अंडा बनता है, लेकिन पुरुषों के साथ ऐसा नहीं होता। जब कोई पुरुष वीर्यपात (Ejaculate) करते हैं तो एक बार में लाखों शुक्राणु (Sperm) निकलते हैं, लेकिन गर्भधारण (Conceive) करने के लिए बस एक ही शुक्राणु की जरुरत होती है। शायद इसलिए ही लोग अपने बच्चे को लाखों में एक कहते हैं। 

महिला के शरीर में अंडा कहाँ होता है, जब वो अंडा निषेचित नहीं होता तो क्या होता है, मासिक धर्म के दौरान शरीर में क्या क्या होता है, ये सब मैं आपको अपने मासिक धर्म के दौरान सम्भोग, सुरक्षित है या असुरक्षित वाले ब्लॉग में बता चुकी हूँ। Youthinfohindi के आज के ब्लॉग में जानते है की अंडा कैसे निषेचित (Fertilize) होता है?


शुक्राणुओं का अंडे तक का सफर-एक नए जीवन की शुरुआत

(Journey of Sperms to Egg-Start of A New Life)

सम्भोग (Sex) के बाद वीर्यपात (Ejacualtion) होता है, और वीर्यपात के बाद शुक्राणुओं (Sperms) को एक बहुत लम्बी दौड़ लगानी पड़ती है। वैसे तो ये दौड़ सिर्फ 20 सेंटीमीटर की ही होती है, लेकिन चूँकि शुक्राणु बहुत छोटे होते हैं तो इसलिए, इनके लिए ये दौड़ वैसी ही है जैसे हमारे लिए 500 किलोमीटर पैदल चलना, यानि कुल मिलाकर, बहुत मेहनत वाला काम। 

बहुत से शुक्राणु तो योनि के अंदर जाते ही मर जाते क्यूंकि योनि अम्लीय (Acidic) होती है। इसके अलावा प्रतिरक्षा तंत्र (Immune system) शुक्राणुओं को कीटाणु समझ कर इनको मारना शुरू कर देते है। यानि अब आगे की दौड़ में वही शुक्राणु आगे बढ़ सकता है जो ताकतवर और स्वस्थ है। 

एक तरफ शुक्राणु अपनी दौड़ में आगे बढ़ रहे होते हैं वही दूसरी ओर अंडा डिंबवाही नलिका (Fallopian Tube) के रास्ते निचे आना शुरू करता है। सम्भोग के दौरान जब महिला को ऑर्गास्म (Orgasm) होता है तो योनि, गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा (Vagina, Uterus and cervix) तीनो एक साथ संकुचित (Contraction) होते हैं, जिसका मकसद शुक्राणुओं को आसानी से अंदर धकेलना होता है। जबतक ये संकुचन चलता है शुक्राणु बिना मेहनत किये तैरते रहते हैं पर जैसे ही ये संकुचन रुकता है, इन शुक्राणुओं को अपनी जी जान लगा कर दौड़ना शुरू करना पड़ता है और बिना किसी मदद के खुद ही आगे बढ़ना पड़ता है। 

सम्भोग के दौरान महिलाएं ऑर्गास्म करती हैं तो उन्हें भी वीर्यपात होता है, ये वीर्यपात वैसे तो चिपचिपा होता है लेकिन गर्भाशय के अंदर पहुंच कर इनकी चिपचिपाहट कम हो जाती है जिससे शुक्राणुओं के लिए तैरना आसान हो जाता है तथा इसके अलावा गर्भाशय की दीवारें शुक्राणुओं को रास्ता दिखाने में मदद भी करती हैं। 

शोधकर्ता अभी तक यह पता लगाने में कामयाब नहीं हो पाएं है की आखिर डिंबवाही नलिका (Fallopian Tube), शुक्राणुओं को कैसे यह सन्देश भेजती है की अंडा निचे की तरफ आ रहा है लेकिन इतना जरूर पता हैं की डिंबवाही नलिका (Fallopian Tube) की सतह पर छोटे छोटे बाल जैसे रेशे (Filament) होते हैं जो मिलकर अंडे को धकेलते है ताकि वो अंडे के पास पहुंच सके। 

हर शुक्राणु अपनी पूरी मेहनत से आगे बढ़ रहा होता है, सबकी कोशिश यही रहती है की वो अंडे तक सबसे पहले पहुंच जाये। कई शुक्राणु तो रास्ता भटक जाते है और डिंबवाही नलिका (Fallopian Tube) में ही अटक कर रह जाते हैं। इन दौरान अंडा प्रोस्टाग्लैंडिस नाम का रसायन (Chemical) छोड़ता है, ये रसायन शुक्राणुओं को सही रास्ता दिखाने का काम करते हैं। 

अंडे की सतह पर ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं, शुक्राणु को बस वही खुद को अंडे से जोड़ना होता है। जब शुक्राणु अंडे तक पहुंच जाता है तब उसके पास आखिरी काम बचा होता हैं अपने सिर को अंडे के अंदर घुसना और पूंछ को बाहर ही छोड़ देना। 

जैसे ही कोई एक शुक्राणु अंडे के अंदर प्रवेश कर जाता है तब अंडा अपनी बाहरी परत यानि ग्लाइकोप्रोटीन को सील कर देता है। यही शुक्राणुओं की दौड़ ख़त्म हो जाती है क्यूंकि एक शुक्राणु के बाद अब कोई और शुक्राणु अंडे के अंदर प्रवेश कर ही नहीं सकता। 

जब शुक्राणु अंडे के अंदर प्रवेश कर जाते हैं तो इसे निषेचित होने में 3 - 4 दिन का समय लगता है और ये निषेचित अंडा गर्भाशय की दिवार से जाकर लग जाता है। वही से शुरुआत होती है एक नए जीवन की यानि महिला गर्भधारण कर लेती है।  




हस्तमैथुन के दौरान भी होता है वीर्यपात

(Ejaculation Happens even During Masturbation)

ऊपर हमने सम्भोग के दौरान संकुचन की बात की लेकिन अगर हस्तमैथुन (masturbation) की बात की जाये तो इसके दौरान भी यही सब होता है। 

आप में से कई लोगों ने फिल्मों में हीरो को शुक्राणु दान करने के लिए एक छोटी सी डब्बी लेकर लेकर जाते देखा ही होगा लेकिन खुलेआम इस बारे में बात करने से हम कतराते और शरमाते हैं। 

कई लोगों के मन में हस्तमैथुन (masturbation) को लेकर काफी सारे वहम और सवाल होते है, जैसे हस्तमैथुन करने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है, हस्तमैथुन करने से चेचक, टीवी जैसी बीमारियां होती है, हस्तमैथुन से जुड़ी साड़ी धारणाएं और भ्रांतियां सच है या नहीं। 

तो आइये आगे बढ़ते है और जानते है की हस्तमैथुन (masturbation) के बारे में विज्ञान का क्या कहना है। 



हस्तमैथुन का वैज्ञानिक शोध 

(Scientific Research of Masturbation)

अमेरिका में हुए एक शोध में 93% पुरुषों और 89% महिलाओं ने माना की वो हस्तमैथुन (masturbation) करते हैं। जर्मनी के आंकड़े भी लगभग ऐसे ही है लेकिन भारत में अब तक ऐसा सर्वेक्षण (Survey) नहीं हुआ है। 

दुनिया के ज्यादातर धर्मों में हस्तमैथुन (masturbation) को बुरे कर्म या पाप से जोड़ा जाता है। लोगों को इससे रोकने के लिए अजीब अजीब भ्रांतियां फैलाई जाती है, जैसे हस्तमैथुन  करने से चेचक हो सकता है, या हाथों में बाल निकल जाते है या टीवी हो जाता है, कइयों का तो यहां तक कहना है की हस्तमैथुन करने से लोग अंधे, बहरे और पागल भी हो सकते हैं। लेकिन अगर विज्ञान और शोध की माने तो वो इन सब बेतुकी बातों का खंडन करते हैं। 


हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है की हस्तमैथुन (masturbation) करना सेहत के लिए अच्छा होता है। इससे शरीर में ख़ुशी वाले हॉर्मोन्स की मात्रा बढ़ती है और तनाव घटता है। इससे दिल की धड़कनें भी बढ़ती है जिसके कारण आप ज्यादा कैलोरीज़ खर्च करते हैं और सेहतमंद रहते है। हस्तमैथुन (masturbation) से नींद भी बहुत अच्छी आती है, हस्तमैथुन करने से महिलाओं को कई तरह के दर्द के साथ मासिक धर्म के दर्द में भी काफी राहत मिलती है। इससे गर्भाशय में गांठ और प्रोस्टेट कैंसर होने खतरा भी काफी कम होता है। 

कुछ शोधकर्ताओं का तो यह तक कहना है की हफ्ते में 2 से 3 बार हस्तमैथुन करने से पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता काफी बेहतर हो जाती है। 


लेकिन ये बात जरूर याद रखें की किसी भी चीज की लत अच्छा नहीं होता। बाकि किसी और बुरी लत की तरह अगर आपको हस्तमैथुन (masturbation) की भी लत लग जाये, पोर्न देखना आपकी मज़बूरी बन जाये तो इन सबसे आपको फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा। कुल मिला कर बात की जाये तो चाहे पुरुष हो या महिला हस्तमैथुन (masturbation) किसी के लिए बुरा नहीं है लेकिन किसी भी चीज की लत बुरी होती है। 



उम्मीद करती हूँ Youthinfohindi का आज का ये ब्लॉग आप सब को जरूर पसंद और समझ आया होगा। अपने सुझाव और सवाल के लिए मुझे आप मुझे कमेंट कर सकते है। आज का मेरा ये ब्लॉग पसंद आया हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों, दोस्तों तथा रिश्तेदारों में शेयर करना ना भूलें। Latest Updates के लिए आप मेरे पेज को Subscribe करना ना भूलें ताकि जब भी मैं कोई पोस्ट डालूं उसकी Notification आप तक सबसे पहले पहुंचे।

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