आप अपने छोटे से बच्चे को अंग्रेजी सिखाना चाहते है पर आपको समझ नहीं आ रहा की कहाँ से शुरू करें तो Youthinfohindi का आज का ये ब्लॉग आपके बहुत काम आने वाला है क्यूंकि आज के ब्लॉग में हम बात करने वाले है की आप अपने बच्चे को अंग्रेजी में बात करना कैसे सीखा सकते है, उसके लिए आपको क्या क्या करना पड़ेगा। तो चलिए शुरू करते है आज का ये ब्लॉग।
माता पिता को अगर इंग्लिश नहीं आती है इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है की आपके बच्चे इंग्लिश नहीं बोल सकते या इंग्लिश में बात नहीं कर सकते क्यूंकि छोटे बच्चों के साथ ज्यादा और धाराप्रवाह (Fluent) इंग्लिश नहीं बोलनी पड़ती इसलिए आप उनको सिखाते सिखाते खुद भी इंग्लिश बोलना सिख सकते है।
चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते है की बच्चों को इंग्लिश सिखाने के लिए माता पिता क्या क्या कर सकते है :
1. इंग्लिश सिखाने का कोई निर्धारित समय नहीं होता - बच्चों को इंग्लिश सिखाने की कोई सही या गलत उम्र नहीं होती। आप जितना जल्दी शुरू करेंगे उतना आपके बच्चे को उसे सिखने में आसानी होगी क्यूंकि जल्दी सिखाना शुरू करने से बच्चो को जल्दी उस भाषा से जानपहचान हो जाएगी।
हम बड़ो को लगता है की बच्चे अभी छोटे है वो हमे सुन नहीं सकते, उनका ध्यान हमारी किसी गतिविधियों पर नहीं होता, इसलिए हम छोटे बच्चो को किसी भी तरीके से बहला फुसला देते है। जैसे कभी उनके सामने रैटल बजा दिया, कभी उनको गोदी में ले के ओले ओले कर दिया, कभी उसके साथ खेलने लग गए। पर इन सब की जगह अगर आप बच्चे की छोटी उम्र यानि जब जब वो 3 - 4 महीने के ही होते है तभी से उनसे इंग्लिश में बात करना शुरू कर दें। बच्चे के साथ जब आप खेलते है उस समय भी आप उनसे इंग्लिश में ही बातें करें। उन्हें समय लगेगा पर वो ये सब जल्दी ही समझने लगेंगे।
हम बच्चों को कोई एक अंग्रेजी का शब्द सिखाते है और सोचते है की बच्चा अब ये बोलने लग जाये पर ऐसा नहीं होता है। अंग्रेजी बोलने के लिए अंग्रेजी में सोचना भी पड़ता है और बच्चे अंग्रेजी में तब सोचना शुरू करेंगे जब आप बच्चों की सुनने की क्षमता बढ़ाते है। जब बच्चा कुछ अच्छे से सुनेगा तभी तो उसे समझेगा और फिर जब कभी आप उससे वो शब्द कहेंगे तो वो उसका जवाब दे पाएगा। इसलिए बच्चों के साथ बात करने की बहुत ज्यादा जरुरत होती है ताकि उनके सुनने की क्षमता का विकास हो और वो हर शब्द को अच्छे से समझ पाएं।
2. आसपास के माहौल का पड़ता है असर - हम जैसा माहौल बच्चे के आसपास बनाते है बच्चे उसके हिसाब से ही खुद को ढाल लेते हैं। अगर बच्चे से आप शुरू से ही अंग्रेजी में बात करेंगे, उसके आस पास या साथ रहने वाले लोग जब अंग्रेजी में बात करेंगे तो बच्चा भी अंग्रेजी में ही बात करना शुरू करेगा। जैसे मान लेते है कोई माता पिता अगर नौकरी पेशा है या किसी और कारण की वजह से बच्चे को नौकर के भरोसे छोड़कर जाते है तो बच्चा फिर उनकी भाषा जल्दी समझने लगता है, उनको अच्छे से पहचानने लगता है और उनकी भाषा बोलने लगता है ना की वो भाषा जिसमे आप बच्चे को बात करते देखना चाहते है।
इसलिए ये बहुत जरुरी है की जैसा आप बच्चे को देखना चाहते है उसके हिसाब से उनसे आसपास का माहौल बनाइये।
3. हर चीज का सही नाम बताएं ना की निक नाम - हम बच्चों को अक्सर कुछ भी कहकर चीजों से परिचित कराते है, जैसे पानी को मम - मम, नहाने को नाउ - नाउ या फिर दूध को दुद्धू - दुद्धू। हम चीज को हम एक निक नाम दे देते है क्यूंकि हमे लगता है की ये हमारे बच्चे को अच्छा लगेगा और बच्चा भी इसे आसानी से बोल पायेगा। लेकीन अगर आप बच्चे को सही शब्द और उसकी अंग्रेजी उसे सिखाना चाहते है तो आप हर शब्द का हिंदी या अंग्रेजी शब्द ही प्रयोग में लाएं। जैसे पानी या वाटर, दूध या मिल्क, नहाना या बाथ, इससे बच्चे को शब्दों को समझने में कोई दुविधा नहीं होगी।
हमने भी अपने बच्चे को हर चीज का सही शब्द ही सिखाया है इसलिए वो हर चीज को उसके सही नाम से ही जानता है उसका सही नाम ही बोलता है।
4. पहले क्या सिखाएं - बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए उसे कोई भारी भड़कम शब्द सिखाना शुरू नहीं करना होता बल्कि जो भी चीज उसके आसपास है या जो भी चीज उसके रोज़ाना के काम में आते है आप उन्ही चीजों की अंग्रेजी बच्चों को सिखाना शुरू करें, यही शब्द आगे चलकर बच्चो को बहुत काम आएंगे। उसके शरीर के अंग, उसका खाना, उसके आस पास की चीजे, उसके खिलौने, पेड़ पौधे, पार्क के झूले, कही बाहर घूमने गए तो वहां की चीजे, घर के सामान जैसी कई चीजे है जिनके अंग्रेजी के नाम आप बच्चो को सिखाना शुरू कर सकते है। आगे चल कर आप इन्ही शब्दों को वाक्यों में सिखाना शुरू करें, इन्ही से बच्चे धीरे धीरे बहुत कुछ सिख जायेंगे।
5. जल्दी सिखाने के लिए थोड़ी नौटंकी जरुरी है - जब भी आप बच्चों को कोई शब्द सिखाएं तो उस शब्द को थोड़ा नाटकीय अंदाज में बतायें और उस चीज के फायदे भी बताएं। जैसे अगर आप बता रहे है Apple, तो आप कह सकते है, बेटा देखो apple, it so big and tasty, it's very delicious and healthy। जब आप ये बच्चे को बता रहे होंगे तो अपने चहरे के हाव भाव को ऐसा दिखाएं जैसे आप किसी बहुत बड़ी और अनोखी चीज के बारे में उसे बता रहे है। ऐसा करने से बच्चे को उस चीज के बारे में सुनने और जानने की काफी उत्सुकता रहेगी साथ ही उसे ये भी समझ आएगा की apple के फायदे क्या क्या हैं।
6. शब्दों को उच्चारण आराम से, तेज़ आवाज में और स्पष्ट करें - बच्चों को जब भी कोई शब्द सिखाएं उस शब्द का उच्चारण आप आराम से करें, वो शब्द थोड़ा तेज़ आवाज में बोलें और वो शब्द एक दम साफ साफ सुनाई देनी चाहिए, इससे बच्चे आसानी से कोई शब्द समझ जाते है और वो आसानी से अंग्रेजी सिख सकते है।
7. शब्दों और वाक्यों को बार बार दोहराएं - जब भी बच्चों को आप कोई शब्द सिखाएं उस शब्द का इस्तेमाल बार बार कई वाक्यों में करें, उस शब्द को कई बार अलग अलग समय, अलग अलग जगहों पर दोहराएं, इससे उन्हें इस एक चीज के बारे में पूरी तरह से जानने-समझने का मौका मिलेगा। ये ना सोचें की एक बार बच्चे को ये शब्द बोल दिया तो वो उसे सिख ही जाएगा, ऐसा बिलकुल नहीं होता उसे सिखाने के लिए आपको हर शब्द और हर वाक्य कई कई बार बोलने और सिखाने पड़ते है।
8. बच्चे के साथ एक-दो घंटा अंग्रेजी में - दिन या रात में से किसी भी समय जब माता पिता बच्चे के साथ टाइम बिता रहे हों, उस समय जो भी बात, कोई कहानी या कोई कविता/राइम्स या कोई भी गतिविधि आप करते हैं उसकी भाषा अंग्रेजी होनी चाहिए। इससे बच्चों को अंग्रेजी सिखने में काफी आसानी होगी। बच्चे बच्चों के साथ जल्दी सीखते है इसलिए या तो आप बच्चों के साथ बच्चों की तरह पेश आएं या उनको ऐसे बच्चों के साथ खेलने दें या प्ले स्कूल भेजें जहाँ बच्चे अंग्रेजी में ही बात करते हों। ये सब चीजे आपको बहुत मदद करेंगी आपके बच्चे को अंग्रेजी सिखाने के लिए।
9. बच्चों के शब्दों को वाक्यों में बदलें - जब बच्चे धीरे धीरे कोई शब्द बोलने लगते है और एक के बाद दूसरे शब्द भी बोलना शुरू कर देते है तो आप उनके इन शब्दों को जोड़कर एक वाक्य बना कर उनको बोलें। जैसे बच्चा बोले apple या give apple तो आप इन शब्दों को जोड़कर एक वाक्य में बदल दें जैसे do you need an apple, my baby or name wants an apple, name likes an apple, baby want to say I want an apple, I would like to have an apple इत्यादि। ऐसे करने से बच्चे को समझ आएगा की वो कैसे एक शब्द का इस्तेमाल करके इतने सारे वाक्य बोल सकता हूँ लेकिन हाँ ऐसा आप हर चीज के साथ करें और बार बार हर जगह करें, लाभ तभी होगा।
10. बच्चों को भी सोचने का मौका दें - अक्सर जब हम बच्चो को कुछ सिखाते है और वो सिखने के चरण में होते है और वो किसी चीज के पास जाकर या उसे हाथ में ले कर सोचने पे पड़े मिलते है। ये सामान्य है आप इस समय बच्चे को टोके नहीं बल्कि उसे सोचने दें की आखिर उसे क्या चाहिए, वो किस चीज के बारे में बात करना चाहता है। उदहारण के लिए अगर आपके बच्चे को सेब चाहिए और वो सेब को देख रहा है या उसके पास जा कर बैठा है पर उसे याद नहीं आ रहा इसे क्या बोलते है और इतने में आपने बोल दिया beta you need apple? बस यहीं उसके सोचने की काबिलियत को आप रोक देते है। आप उसे सोचने दें और बोलने दें या फिर आप बच्चे को कोई सहायक शब्द बोलें ताकि उसे Apple का नाम याद करने में आसानी हो। जैसे beta you need this, what is this, beta like it so much ऐसा करने से बच्चे को सहायक शब्द मिलेंगे और उसे याद आ जाएगा की उसे Apple चाहिए।
11. टिपण्णी ज्यादा और जवाब कम - कल आपने बच्चे को एक चीज के बारे में बताया और आज आप सोचेंगे की वो उस चीज के बारे में बता देगा तो ऐसा सोचना गलत है। कभी कभी बच्चे बता भी देते है लेकिन कभी कभी उन्हें सोचने में टाइम लगता है। जैसे कल आपने बच्चे को बताया Apple is Red तो आज आप उसको बोलिये Apple is so Big, Apple is very Healthy और भी कुछ आप बोल सकते है जिससे उसे Apple को समझने में आसानी हो और हो सकता है वो ये खुद ही बोल दे Papa या Mumma Apple is Red।
बच्चे को सोचने दे उसे मौका दें सोचकर बोलने का, आप खुद ही जवाब ना दें।
12. बच्चे से बातचीत के लिए समय निकालें - आप जब चाहे अपने बच्चे के लिए थोड़ा समय निकालें और आप उसको जो सीखना चाहते है वो चीजें बच्चे के साथ बात करें। आपके पास सुबह का समय हो या शाम का या रात का, कुछ बच्चे पॉटी करते समय बातें करना पसंद करते हैं। कहने का मतलब ये है की वो कोई सा भी समय जब आप और आपका बच्चा बातें कर सकते है, आप बातें कीजिये, बच्चे को नए नए अंग्रेजी के शब्द, उनके अर्थ, कुछ वाक्य, जो भी कुछ हो बातें करते रहिये। इससे खाली समय में भी बच्चे खेलते खेलते ये सब सिख लेते है। जब आप बच्चे से खुल कर बात करते है, उसकी बात समझते है और उसके अनुसार उसे और कुछ सिखाते है तो इससे आपके बच्चे की सोचने की, बातचीत करने की और अंग्रेजी बोलने की कला में काफी निखार आता है और बच्चे को अंग्रेजी भाषा में रूचि भी होने लगती है।
हर बच्चा अलग होता है साथ हर माता भी अलग अलग स्वाभाव और विचार के होते है। तो ये पूरी तरह आप पर निर्भर है की आप बच्चे के साथ कब और कितना समय बिताते है या उसे कैसे सिखाते है। ऊपर बताये हुए उपाए हमने अपनाएं है और अपने बच्चे में काफी फर्क देखा है उसी के आधार पर मैंने इसे आप लोगों से बताया है, आपके मामले में ये बिलकुल अलग हो सकता है तो जैसा आपको ठीक लगे वैसा कीजिये।
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